होम / संविधान और हम-2: संविधान निर्माण की प्रक्रिया का संदर्भ

संविधान निर्माण की प्रक्रिया का सिलसिलेवार संदर्भ

भारतीय संविधान के निर्माण की पहल भले ही हमें बीसवीं सदी के मध्य में होती हुई दिखती है लेकिन इसके पीछे की बुनियादी प्रक्रिया बहुत पहले आरंभ हो चुकी थी। ब्रिटिश काल के कानूनों से लेकर दयानंद सरस्वती के ‘सत्यार्थ प्रकाश’ और बाल गंगाधर तिलक के ‘स्वराज’ के आह्वान और ‘संविधान विधेयक’ तक में संविधान की प्रारंभिक अवधारणा को महसूस किया जा सकता है। इस अवधारणा से कैबिनेट मिशन तक के सफर को संविधान निर्माण का सफर माना जा सकता है। इस सफर में देश के प्राचीन इतिहास से लेकर 190 वर्ष की औपनिवेशिक विरासत तक सभी शामिल हैं। इस अंक में प्रस्‍तुत है संविधान निर्माण की प्रक्रिया का सिलसिलेवार संदर्भ।

No comments to show.

Similar Posts

  • हिंदी दिवस: राज भाषा निर्माण का संघर्ष

    जिस समय भारत ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आज़ाद हो रहा था और एक नए राष्ट्र के रूप में उसका एकीकरण हो रहा था, ठीक उसी समय पहली बार भारत की राज भाषा और राष्ट्र भाषा का प्रश्न खड़ा हुआ। संविधान सभा में हिंदी और अहिंदीभाषी सदस्यों के बीच लंबी बहस के बाद हिंदी को राज भाषा बनाने पर सहमति बन सकी।

  • नागरिक चक्रम भाग 3 : फर्ज

    नागरिक चक्रम की कहानियां दरअसल एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • नागरिक चक्रम भाग 1: ध्‍यान-बेध्‍यान

    नागरिक चक्रम की कहानियां दरअसल एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • नागरिक चक्रम भाग 7: ऊंची अदालत

    नागरिक चक्रम की कहानियां एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • नागरिक चक्रम भाग 9: पंद्रह अगस्त 

    नागरिक चक्रम की कहानियां एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • बाइस जुलाई: तिरंगे को अपनाने का दिन

    भारत की संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को औपचारिक रूप से तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था। 23 जुलाई को इसे पहली बार औपचारिक रूप से फहराया गया। राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण की पूरी कहानी बहुत दिलचस्प है। 1857 के पहले स्वतंत्रता आंदोलन के पहले देश की विभिन्न रियासतों और राज्यों के अपने-अपने ध्वज थे। विडंबना ही है कि संपूर्ण भारत को उसका पहला ध्वज साम्राज्यवादी अंग्रेजी शासन ने दिया। नीले रंग के इस झंडे में बांयी ओर ऊपर यूनियन जैक बना था जबकि दाहिने हिस्से के बीच में ब्रिटिश क्राउन में स्टार ऑफ इंडिया का चित्र बना था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *