अपने मित्र के साथ भेदभाव होता देख चक्रम ने क्या प्रतिक्रिया दी, देखिए और जानें?
जब से चक्रम ने देखा है कि समाज में छुआछूत होती है और अलग अलग लोगों के साथ अलग-अलग
बर्ताव होता है, तब से उसे व्यक्ति और समाज के व्यवहार को समझने का सलीका आ गया। चक्रम ने
अपने स्कूल में भेदभाव को कैसा पहचाना, जानिये नागरिक चक्रम की इस कहानी में।
- नागरिक चक्रम भाग 13: प्रतिस्पर्धा नहीं स्पर्धा
- नागरिक चक्रम भाग 12: अति धार्मिकता और प्रेम
- नागरिक चक्रम भाग 11: भूमिका
- नागरिक चक्रम भाग 10: बंधुत्व
- नागरिक चक्रम भाग 9: पंद्रह अगस्त
