होम / नागरिक चक्रम भाग 3 : फर्ज

सब लोग समान हैं, यह याद कर क्‍यों दु:खी हो गया चक्रम?

नागरिक चक्रम की कहानियां दरअसल एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। उसके मन में तमाम प्रश्न और दुविधाएं हैं। वह यथास्थिति को स्वीकार नहीं कर लेता बल्कि मन में उठ रही दुविधाओं और प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है। चक्रम कोई काल्पनिक चरित्र नहीं है। उसका वजूद है और जरूर है। जब हम अपने भीतर के समाज और व्यवस्था को जानने लगते हैं, तब चक्रम का जन्म होता है। नागरिेक चक्रम की यह शृंखला एक किशोर के नागरिक बनने की कहानियां हैं।

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