होम / नागरिक चक्रम भाग 10: बंधुत्व  
चक्रम ने जाना की बधुत्व का का क्या अर्थ होता है?

यूं तो भारतीय संविधान की उद्देशिका में लिखा है कि सबको इंसाफ मिले, सब एक दूसरे के साथ मोहब्बत से रहें, एक दूसरे के ख़यालात का सम्मान करें। कोई ऊंच-नीच न हो और लोग सोच-समझकर अपने सांसद, विधायक चुनें। मसला यह है कि संविधान की इन बातों को समझने के लिए खुद प्रयोग करने पड़ते हैं।चक्रम को बंधुता पर प्रोजेक्ट मिला, तो उसने कैसे प्रयोग किया, देखते हैं नागरिक चक्रम की इस कहानी में।

Similar Posts

  • देश का विभाजन, संविधान और नेहरू

    ऐतिहासिक प्रमाणों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल समेत उस दौर के सभी प्रमुख नेता भारत के विभाजन को टालना चाहते थे। परंतु हालात के मुताबिक वे सभी इसे लेकर अलग-अलग नज़रिया भी रखते थे। कुछ मसलों पर न तो सहमति बन पा रही थी और न ही असहमति। मुस्लिम लीग को स्वतंत्र भारत में सरकार बनाने का आमंत्रण भी ऐसा ही एक मसला था।

  • नागरिक चक्रम भाग 6: दर्जी

    नागरिक चक्रम की कहानियां एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • 26 जनवरी: उन बहसों को याद करने का दिन

    26 जनवरी वह दिन है जब 1950 में हमारे देश ने संविधान को अपनाया था और एक गणराज्य के रूप में अपनी नई यात्रा की शुरुआत की थी। उस समय तक देश का शासन भारत शासन अधिनियम के संशोधित स्वरूप के माध्यम से चल रहा था। प्रस्तुत है संविधान सभा की बैठकों के अंतिम सप्‍ताह के महत्‍व को रेखांकित करता यह आलेख।

  • नागरिक चक्रम भाग 11: भूमिका

    नागरिक चक्रम की कहानियां एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *