होम / नागरिक चक्रम भाग 2 : प्रतिक्रिया एवं देखना
बातों के सिरों को जोड़ें तो बनती है नई समझ

नागरिक चक्रम की कहानियां दरअसल एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। उसके मन में तमाम प्रश्न और दुविधाएं हैं। वह यथास्थिति को स्वीकार नहीं कर लेता बल्कि मन में उठ रही दुविधाओं और प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है। चक्रम कोई काल्पनिक चरित्र नहीं है। उसका वजूद है और जरूर है। जब हम अपने भीतर के समाज और व्यवस्था को जानने लगते हैं, तब चक्रम का जन्म होता है। नागरिेक चक्रम की यह शृंखला एक किशोर के नागरिक बनने की कहानियां हैं।

Similar Posts

  • मैत्री की शिक्षा संभव, इसका विस्‍तार करना असली चुनौती

    प्रख्यात शिक्षाविद अमन मदान ने विकास संवाद द्वारा आयोजित ‘बाल अधिकार मीडिया अवार्ड’ कार्यक्रम में ‘मैत्री की शिक्षा’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्‍होंने कहा, “मैत्री की शिक्षा संभव है लेकिन वास्तविक चुनौती इसकी शिक्षा की नहीं इसके विस्तार की है क्योंकि हमारा देश, समाज, संविधान और सारा विश्व मैत्री के मूल्य से ही संचालित हो सकता है।”

  • नागरिक चक्रम भाग 1: ध्‍यान-बेध्‍यान

    नागरिक चक्रम की कहानियां दरअसल एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • नागरिक चक्रम भाग 7: ऊंची अदालत

    नागरिक चक्रम की कहानियां एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • संविधान और हम-1 भारतीय संविधान: ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ

    भारतीय संविधान को जानने,मानने और अपनाने के लिए ‘संविधान संवाद’ की पहल ‘संविधान और हम’ वीडियो शृंखला की आठ कड़ियों में हम प्रस्‍तुत कर रहे हैं संविधान निर्माण की प्रक्रिया से लेकर महत्‍वपूर्ण प्रावधानों और उसमें हुए संशोधनों का लेखा जोखा।

  • बौद्ध धर्म की दृष्टि में संवैधानिक मूल्‍य

    बाबा साहेब अम्बेडकर संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से एक सामंजस्यपूर्ण भारतीय राष्ट्र की स्थापना करना चाहते थे। उन्हें अहसास था कि यदि समाज के अंतर्निहित विरोधाभासों से प्रभावी ढंग से नहीं निपटा गया तो संविधान के उच्‍च आदर्श अधूरे रह जाएंगे।

  • डॉ. बी. आर. अम्बेडकर और संविधान

    संविधान के साथ डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का नाम इस प्रकार जुड़ा हुआ है कि दोनों को एक दूसरे के बिना अधूरा कहा जा सकता है। उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता भी कहा जाता है। अक्सर यह सुनने में आता है कि भारत के संविधान का निर्माण डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने किया। परंतु क्या यह पूरा सच है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *