होम / संविधान संवाद: यात्रा, अनुभव और अभिव्‍यक्ति

संविधान संवाद फैलोशिप 2022-25 की यात्रा अनुभव

मेंटर्स, पत्रकार और वकील फेलो की अभिव्‍यक्ति

संवैधानिक मूल्‍यों के बोध, चेतना के विकास और इन्‍हें आत्‍मसात करने के लिए विकास संवाद ने ‘संविधान संवाद’ कार्यक्रम आरंभ किया है। इसके तहत 2022 से 2025 तक ‘संविधान संवाद फैलोशिप’ प्रदान की है। इस यात्रा के सहभागी रहे मेंटर्स, मार्गदर्शक और 48 पत्रकारों व 12 वकील फेलो ने अपने अनुभवों को आलेख और रिपोर्ट में अभिव्‍यक्‍त किया है। ‘हमारा सफर: यात्रा, अनुभव और अभिव्‍यक्ति’ एक समृद्ध यात्रा का दिलचस्‍प दस्‍तावेज है। इस यात्रा के हर पड़ाव पर सीख और अनुभव की एक प्रेरक कहानी है।

Similar Posts

  • हिंदी दिवस: राज भाषा निर्माण का संघर्ष

    जिस समय भारत ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आज़ाद हो रहा था और एक नए राष्ट्र के रूप में उसका एकीकरण हो रहा था, ठीक उसी समय पहली बार भारत की राज भाषा और राष्ट्र भाषा का प्रश्न खड़ा हुआ। संविधान सभा में हिंदी और अहिंदीभाषी सदस्यों के बीच लंबी बहस के बाद हिंदी को राज भाषा बनाने पर सहमति बन सकी।

  • 26 जनवरी: उन बहसों को याद करने का दिन

    26 जनवरी वह दिन है जब 1950 में हमारे देश ने संविधान को अपनाया था और एक गणराज्य के रूप में अपनी नई यात्रा की शुरुआत की थी। उस समय तक देश का शासन भारत शासन अधिनियम के संशोधित स्वरूप के माध्यम से चल रहा था। प्रस्तुत है संविधान सभा की बैठकों के अंतिम सप्‍ताह के महत्‍व को रेखांकित करता यह आलेख।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *