होम / नागरिक चक्रम भाग 7: ऊंची अदालत
चक्रम ने जाना कि किसी भी समस्या का समाधान पाने में अदालत हमारी मदद करती है।

जब भी चक्रम देश का नक्शा देखता, तब उसे उसमें केवल प्रदेशों की सीमाएं नहीं दिखतीं। उसे देश के नक़्शे में हज़ारों-लाखों सीमा रेखाएं दिखतीं। ये सीमाएं थीं आर्थिक विभाजन की, सामाजिक विभाजन की, लैंगिक विभाजन की, भौगोलिक विभाजन की; लेकिन उसने अपने गांव में विभाजन की सीमारेखा को पहचाना और उसे मिटाने के लिए न्यायपालिका का रुख किया; कैसे? आइये पढ़ते हैं नागरिक चक्रम की इस कहानी में।

Similar Posts

  • नागरिक चक्रम भाग 6: दर्जी

    नागरिक चक्रम की कहानियां एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • देश का विभाजन, संविधान और नेहरू

    ऐतिहासिक प्रमाणों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल समेत उस दौर के सभी प्रमुख नेता भारत के विभाजन को टालना चाहते थे। परंतु हालात के मुताबिक वे सभी इसे लेकर अलग-अलग नज़रिया भी रखते थे। कुछ मसलों पर न तो सहमति बन पा रही थी और न ही असहमति। मुस्लिम लीग को स्वतंत्र भारत में सरकार बनाने का आमंत्रण भी ऐसा ही एक मसला था।

  • लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव, संविधान और नेहरू

    नेहरू जिस भारत का स्वप्न देखते थे, उसमें टुकड़ों में बंटे हुए भारत के लिए कोई जगह नहीं थी। उनके मन में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक एक भारत की छवि थी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *