नागरिक चक्रम भाग 4: जाति
नागरिक चक्रम की कहानियां दरअसल एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।
नागरिक चक्रम की कहानियां दरअसल एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।
मशीनी होती जिंदगी अब मुहावरा भर नहीं रह गया है। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के आने के बाद अब इंसान का मशीन बन जाना और मशीन का इंसान बन जाना संभव है। दूसरी तरफ, एआई केे लाभ भी गिनाए जा रहे हैं। यानी, यह केवल खतरा नहीं है बल्कि अवसर भी है।
आर्थिक बदहाली, हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं, सांप्रदायिक वैमनस्यता के तूफ़ान के बीच संविधान सभा के 250 से अधिक प्रतिनिधि, भारत के लिए ऐसा संविधान…
उन्नीसवीं सदी में भारतीय महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण की बात आने पर सावित्रीबाई फुले का जिक्र लाजिमी है। सावित्रीबाई फुले को याद करना इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि यह समय समता, समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता जैसे संवैधानिक मूल्यों को देश और समाज में पुन: स्थापित करने का भी है। सावित्रीबाई फुले के विचार इस सिलसिले में बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।
मूल्य वास्तव में जीवन शैली के मानकों के रूप में समझे जा सकते हैं। कोई भी व्यक्ति अपना जीवन किन सिद्धांतों के आधार पर जीता है, यह उसके ‘मूल्यों’ से ही तय होता है…