होम / नागरिक चक्रम भाग 4: जाति

अपने मित्र के साथ भेदभाव होता देख चक्रम ने क्या प्रतिक्रिया दी, देखिए और जानें?

जब से चक्रम ने देखा है कि समाज में छुआछूत होती है और अलग अलग लोगों के साथ अलग-अलग
बर्ताव होता है, तब से उसे व्यक्ति और समाज के व्यवहार को समझने का सलीका आ गया। चक्रम ने
अपने स्कूल में भेदभाव को कैसा पहचाना, जानिये नागरिक चक्रम की इस कहानी में।

No comments to show.

Similar Posts

  • नागरिक चक्रम भाग 5: अंधविश्वास

    हम सब कई बातों को सुनते हैं और उन पर विश्वास करने लगते हैं। समाज में ऐसी कई बातें होती हैं,
    जिनका कोई वैज्ञानिक या प्रामाणिक आधार नहीं होता है, लेकिन लोग आंखें मूंद कर उनमें भरोसा करते हैं। इस बार चक्रम से मिलने आये कुछ कौए। कौए! अरे वही जो काँव-काँव करते हैं। उनकी क्या बातचीत हुई, आइये पढ़ते हैं नागरिक चक्रम की इस कहानी में।

  • हिंदी दिवस: राज भाषा निर्माण का संघर्ष

    जिस समय भारत ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आज़ाद हो रहा था और एक नए राष्ट्र के रूप में उसका एकीकरण हो रहा था, ठीक उसी समय पहली बार भारत की राज भाषा और राष्ट्र भाषा का प्रश्न खड़ा हुआ। संविधान सभा में हिंदी और अहिंदीभाषी सदस्यों के बीच लंबी बहस के बाद हिंदी को राज भाषा बनाने पर सहमति बन सकी।

  • संविधान और हम-2: संविधान निर्माण की प्रक्रिया का संदर्भ

    ‘संविधान संवाद’ की पहल ‘संविधान और हम’ वीडियो शृंखला की आठ कड़ियों में हम प्रस्‍तुत कर रहे हैं संविधान निर्माण की प्रक्रिया से लेकर महत्‍वपूर्ण प्रावधानों और उसमें हुए संशोधनों का लेखा जोखा। इस अंक में प्रस्‍तुत है संविधान निर्माण की प्रक्रिया का सिलसिलेवार संदर्भ।

  • नागरिक चक्रम भाग 9: पंद्रह अगस्त 

    नागरिक चक्रम की कहानियां एक ऐसे किशोर की कहानियां हैं जो नागरिक बनने की प्रक्रिया में है। वह प्रश्नों के उत्तर खोजने की इच्छा भी रखता है।

  • सबसे कटु दौर में लोकतांत्रिक और मूल्‍ययुक्‍त बना संविधान

    आर्थिक बदहाली, हिंसा, प्राकृतिक आपदाओं, सांप्रदायिक वैमनस्यता के तूफ़ान के बीच संविधान सभा के 250 से अधिक प्रतिनिधि, भारत के लिए ऐसा संविधान…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *