आप संवैधानिक मूल्यों से क्या समझते हैं? क्या इन मूल्यों को जानने के लिए किसी शोध की आवश्यकता है? इस प्रश्न का उत्तर होगा, नहीं। हम संवैधानिक मूल्यों को अपनी भाषा में, अपनी तरह से जानेंगे और समझेंगे तो उन्हें अधिक आत्मसात कर पाएंग। जैसे, न्याय का हमारे लिए क्या अर्थ है? क्या हम अपने लिए न्याय मांगें तो सही और दूसरे अपने लिए न्याय की उम्मीद करें तो अनुचित है?
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हम सब कई बातों को सुनते हैं और उन पर विश्वास करने लगते हैं। समाज में ऐसी कई बातें होती हैं,
जिनका कोई वैज्ञानिक या प्रामाणिक आधार नहीं होता है, लेकिन लोग आंखें मूंद कर उनमें भरोसा करते हैं। इस बार चक्रम से मिलने आये कुछ कौए। कौए! अरे वही जो काँव-काँव करते हैं। उनकी क्या बातचीत हुई, आइये पढ़ते हैं नागरिक चक्रम की इस कहानी में।
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