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संविधान निर्माण की प्रक्रिया का सिलसिलेवार संदर्भ

भारतीय संविधान के निर्माण की पहल भले ही हमें बीसवीं सदी के मध्य में होती हुई दिखती है लेकिन इसके पीछे की बुनियादी प्रक्रिया बहुत पहले आरंभ हो चुकी थी। ब्रिटिश काल के कानूनों से लेकर दयानंद सरस्वती के ‘सत्यार्थ प्रकाश’ और बाल गंगाधर तिलक के ‘स्वराज’ के आह्वान और ‘संविधान विधेयक’ तक में संविधान की प्रारंभिक अवधारणा को महसूस किया जा सकता है। इस अवधारणा से कैबिनेट मिशन तक के सफर को संविधान निर्माण का सफर माना जा सकता है। इस सफर में देश के प्राचीन इतिहास से लेकर 190 वर्ष की औपनिवेशिक विरासत तक सभी शामिल हैं। इस अंक में प्रस्‍तुत है संविधान निर्माण की प्रक्रिया का सिलसिलेवार संदर्भ।

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