संवैधानिक नैतिकता और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
डॉ. अम्बेडकर मानते थे कि एक संवैधानिक राज्य की स्थापना के लिए केवल संवैधानिक प्रावधानों को अपना लेना पर्याप्त नहीं बल्कि उसके लिए संवैधानिक नैतिकता…
डॉ. अम्बेडकर मानते थे कि एक संवैधानिक राज्य की स्थापना के लिए केवल संवैधानिक प्रावधानों को अपना लेना पर्याप्त नहीं बल्कि उसके लिए संवैधानिक नैतिकता…
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सन 1945 में ही अनुसूचित जाति फेडरेशन के लिए संविधान के रूप में एक दस्तावेज तैयार कर चुके थे। यह दस्तावेज मुख्य रूप से नागरिकों…
अच्छी से अच्छी बात में कोई न कोई कमी होती ही है। भारतीय संविधान भी पूरी तरह त्रुटियों से रहित नहीं है। इसमें भी कमियां हैं लेकिन कुछ ऐसे सूत्र भी हैं जिन्हें अपनाकर…
सन 1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय की 13 सदस्यीय संविधान पीठ ने 7-6 के बंटे हुए निर्णय में कुछ ऐसी स्थापनाएं दीं…
भारत की संविधान सभा में धर्मांतरण के विषय पर गंभीर बहस हुई क्योंकि उपनिवेशवाद के उस दौर में ईसाई धर्मांतरण एक संवेदनशील विषय के रूप में उभर चुका था…
भारतीय संविधान की प्रस्तावना की खूबी यह है कि इसका एक-एक शब्द महत्वपूर्ण है और वह यह बताता है कि हमारे पूर्वज कैसा भारत बनाना चाहते थे। वह राष्ट्र निर्माण…
देश आज़ाद हुआ लेकिन विभाजन की विभीषिका हमेशा के लिए हमारे अंत:करण पर चस्पा हो गयी। एक तरफ देश अंग्रेजों की गुलामी से निजात पाने के लिए प्रयासरत था…
स्वतंत्र भारत में राजाओं-महाराजाओं और नवाबों आदि को मिले विशेष अधिकारों को लेकर आम जनमानस में कई कहानियां प्रचलित हैं। प्रिवी पर्स यानी निजी थैली…
उपनिवेशवाद के विरुद्ध और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले आदिवासी समुदायों को न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में जरूरी तवज्जो नहीं मिली…