संवैधानिक मूल्य की अवहेलना है मीडिया ट्रायल
आजादी के बाद देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुख्य झंडाबरदार मीडिया का स्वरूप जितना बहुआयामी होता गया है, उसी अनुपात में उसने न्यायिक सत्ता…
आजादी के बाद देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुख्य झंडाबरदार मीडिया का स्वरूप जितना बहुआयामी होता गया है, उसी अनुपात में उसने न्यायिक सत्ता…
सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 में आए फैसले में आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों…
हमारे देश में संविधान की गारंटी के बाद भी मानवीय गरिमा का हनन जारी है। जबकि संविधान के भाग 3 में स्पष्ट रूप से सभी नागरिको को समता, स्वातंत्र्य…
सुप्रीम कोर्ट के सामने अपील में एकमात्र प्रश्न गया था कि अभियुक्त लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के अंतर्गत दंडनीय यौन हमले के अपराध…
कायदे से प्रेस स्वतंत्रता के मामले में भारत का नाम दुनिया के पहले पांच देशों में होना चाहिए था, लेकिन हो उलटा रहा है। हम 11 स्थान और नीचे चले गए हैं। प्रेस और प्रकारांतर से मीडिया की जुबान का इस तरह कैद होना अंतत: संवैधानिक मूल्यों का ही हनन है और संवैधानिक मूल्य ही भारत राष्ट्र के कायम रहने की गारंटी है। मीडिया के पैरों का हिलना संविधान के पायों का डगमगाना है।
न्याय का अर्थ है नई दिशा की ओर बढ़ना ना कि अतीत की परिस्थितियों की ओर वापस लौटना। क्या हमें ऐसा होता दिखाई दे रहा है? वर्तमान परिस्थितियों तो जैसे प्रतिशोध…
हमारे संविधान में बंधुता और न्याय शब्द बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये कानून से अधिक हमारे समाज से ताल्लुक रखते हैं। इस आलेख में संविधान में इन शब्दों के प्रवेश…
समलैंगिक विवाहों से संबंधित हालिया महत्वपूर्ण निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने सामाजिक नैतिकता और संवैधानिक नैतिकता के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है…
देश की संविधान सभा में हमारे संविधान निर्माताओं ने अवसरों की समानता बनाम आरक्षण विषय पर बहुत विस्तार से चर्चा की थी। संविधान सभा की बहस से यह…